Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
संकेत तथा लकà¥à¤·à¤£
फोड़ा बाल के चारों ओर ऊबड़ लाल, पस से à¤à¤°à¤¾ हà¥à¤† लमà¥à¤ª होता है जो कोमल, गरà¥à¤® और बहà¥à¤¤ ही पीड़ादायक होता है। यह मटर के आकार से लेकर गोलà¥à¤« की गेंद के आकार तक का हो सकता है। जब फ़ोड़ा पक जाता है और उससे पस निकलने के लिठतैयार हो जाता है, तब इसके गांठके केनà¥à¤¦à¥à¤° में à¤à¤• पीला या सफेद बिंदॠबन जाता है। इसके गंà¤à¥€à¤° संकà¥à¤°à¤®à¤£ में रोगी को बà¥à¤–ार का अनà¥à¤à¤µ हो सकता है, उसकी लसिका में सूजन हो सकती है और उसे थकान à¤à¥€ महसूस होता है। इस आवरà¥à¤¤à¥€ फोड़े को जीरà¥à¤£ फà¥à¤‚सी कहा जाता है।[1][2][3][4]
कारण
आमतौर पर, यह तà¥à¤µà¤šà¤¾ में मौजूद जीवाणॠजैसे सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤«à¥€à¤²à¥‹à¤•ोसी के कारण होता है। जीवाणॠसंबंधी उपनिवेशण बाल के रोम से शà¥à¤°à¥‚ होता है और इसके कारण सामानà¥à¤¯ कोशिका पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ तथा सूजन होने लगता है। इसके अलावा, अफà¥à¤°à¥€à¤•ा में तà¥à¤®à¥à¤¬à¥ मकà¥à¤–ी के कारण फैलने वाले रोग से मियासिस हो सकता है, जो सामानà¥à¤¯ तौर पर तà¥à¤µà¤šà¥€à¤¯ फà¥à¤‚सी के साथ होते है। फà¥à¤‚सी रोग के लिठजोखिम कारको में नासिका के अनà¥à¤¦à¤° जीवाणॠका जमा होना, मधà¥à¤®à¥‡à¤¹, मोटापा, लिमà¥à¤«à¥‹à¤ªà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¾à¤‡à¤«à¤²à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µ, केंसर, कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ और रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ारक शकà¥à¤¤à¤¿ को दबाने वाली दवाइयां आदि शामिल हैं।
जटिलताà¤à¤
फोड़े के सबसे आम जटिलताओं में तà¥à¤µà¤šà¤¾ में धबà¥à¤¬à¥‡ और संकà¥à¤°à¤®à¤£, रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ में संकà¥à¤°à¤®à¤£, मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में संकà¥à¤°à¤®à¤£, गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ में संकà¥à¤°à¤®à¤£, या अनà¥à¤¯ अंगों में फोड़ा होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ शामिल हैं। संकà¥à¤°à¤®à¤£ रकà¥à¤¤à¤§à¤¾à¤°à¤¾ (सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸) में à¤à¥€ फ़ैल सकता है और कà¤à¥€ कà¤à¥€ जीवन के लिठजोखिम का कारण à¤à¥€ बन सकता है।
उपचार
सà¤à¥€ फà¥à¤‚सी के ईलाज के लिठउनको ख़ाली करना पड़ता है। ख़ाली करने के लिठà¤à¤• कपडे को गरà¥à¤® नमक के पानी से à¤à¤¿à¤—ोने पर वह जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कारगर होता है। फ़ोड़े को धोना और à¤à¤‚टीबायोटिक कà¥à¤°à¥€à¤® तथा à¤à¤‚टीसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• चाय के पेड़ के तेल की à¤à¤• पटà¥à¤Ÿà¥€ से फà¥à¤‚सी को आवरित करते हà¥à¤ बांधना à¤à¥€ चिकितà¥à¤¸à¤¾ के लिठलाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• होता है। फà¥à¤‚सी को निरिकà¥à¤·à¤£ किठबिना फोडना या निचोड़ना नहीं चाहिà¤, अनà¥à¤¯à¤¥à¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£ के फैलने का खतरा हो सकता है।
गंà¤à¥€à¤° जटिलताओं के कारण जोखिम उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ कर सकने वाले फà¥à¤‚सी को à¤à¤• चिकितà¥à¤¸à¤• दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ही छिनà¥à¤¨ करके सà¥à¤–ाया जाना चाहिà¤. इनमें सामानà¥à¤¯ से बड़े फोड़े, दो सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹à¥‹à¤‚ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक रहे फोड़े तथा चेहरे के मधà¥à¤¯ में और रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ के पास होने वाली फà¥à¤‚सिया à¤à¥€ शामिल हैं।
आवरà¥à¤¤à¤• फोड़े या बड़े फोड़े के लिठसंवेदनशील कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° (जैसे की नासिका के आस पास या उस के अनà¥à¤¦à¤° तथा कान के अनà¥à¤¦à¤°) के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक उपचार की सलाह दी जाती है।
| --------------------------- | --------------------------- |